वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन के प्रमुख कदम और नई नीति अपडेट

जब भी भारत में आर्थिक खबर आती है, निर्मला सीतारमन का नाम साथ सुनाई देता है। उनका काम सिर्फ बजट बनाना नहीं, बल्कि हर नागरिक की जेब पर असर डालने वाले फैसले लेना भी है। तो चलिए, जानते हैं इनके कुछ सबसे बड़े कदम और कैसे ये आपके रोज़मर्रा के खर्चों को बदल सकते हैं।

बजट 2025: मुख्य आकर्षण

सीतारमन ने बजेट 2025 में दो‑तीन ऐसे बदलाव किए जो तुरंत ध्यान खींचे। पहला, छोटे व्यवसायों के लिए टैक्स रिफ़ंड को तेज़ किया गया—अब 45 दिन की बजाय 30 दिन में पैसा वापस मिलेगा। दूसरा, मध्यम वर्ग के लिए आयकर स्लैब बढ़ा कर अधिक बचत की सुविधा दी गई। तीसरा, डिजिटल सॉल्यूशन्स पर फोकस करके इलेक्ट्रॉनिक भुगतान में छूट दी गई, जिससे लेन‑देनों का खर्च कम होगा।

GST रिफ़ंड और कर राहत

वित्त मंत्री ने GST के तहत एक नई राहत योजना लॉन्च की। 1 नवंबर 2024 से शुरू होकर 2025 में दायर किए गए सभी वैध GST रिटर्न पर ब्याज और जुर्माना माफ़ हो जाएगा—सिर्फ उन मामलों को छोड़कर जहाँ धोखाधड़ी का प्रमाण हो। इससे छोटे व्यापारी जल्दी नकदी प्रवाह पा सकेंगे और व्यापार में स्थिरता आएगी।

अगर आप स्टॉक मार्केट या शेयरों में निवेश करते हैं, तो सीतारमन की नीतियों पर भी नजर रखें। हालिया CDSL शेयर उछाल और Subex के Google Cloud साझेदारी से दिख रहा है कि वित्तीय टेक्नोलॉजी को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे कदम निवेशकों को नई संभावनाएँ देते हैं, खासकर उन कंपनियों में जो डेटा प्रबंधन और धोखाधड़ी रोकथाम पर काम कर रही हैं।

सारांश में, निर्मला सीतारमन की नीतियां दो चीज़ें करती हैं: छोटे व्यापारियों के लिए आसान बनाती हैं और बड़े निवेशकों को नई टेक‑ड्रिवन अवसर देती हैं। चाहे आप टैक्स रिफ़ंड का इंतज़ार कर रहे हों या डिजिटल पेमेंट की सुविधा चाहते हों, इन बदलावों से आपके खर्च में फर्क पड़ेगा। आगे भी ऐसी अपडेट्स पर नज़र रखें—क्योंकि वित्तीय दुनिया लगातार बदलती रहती है और सही जानकारी ही आपको आगे रखेगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया 2025 का बजट: आठवीं बार रिकॉर्ड कायम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया 2025 का बजट: आठवीं बार रिकॉर्ड कायम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2025 को अपना आठवां लगातार केंद्रीय बजट पेश कर इतिहास बनाया। यह बजट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें धीमी हो रही आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने और महंगाई से जूझ रहे मध्य वर्ग के लिए राहत उपायों की उम्मीद है। बजट का ध्यान खपत बढ़ाने और राजकोषीय घाटा कम करने के रोडमैप पर टिका हुआ है। 2025 के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था 6.3% से 6.8% तक बढ़ने का अनुमान है।