
उच्च ब्याज दरें – क्या हैं, क्यों बढ़ती हैं और कैसे बचें
क्या आप भी हर महीने लोन के EMI देख कर उलझन में पड़ते हैं? अक्सर ऐसा तब होता है जब ब्याज की दरें अचानक ऊपर चली जाती हैं। इस लेख में हम बतायेंगे कि ब्याज दरें क्यों बढ़ती हैं, उनका आपके खर्च पर क्या असर होता है और कुछ आसान कदम जिससे आप बचाव कर सकते हैं.
उच्च ब्याज दरों का असर
ब्याज दरें जब हाई होती हैं तो दो चीज़ें साफ़ दिखती हैं – कर्ज की लागत बढ़ जाती है और बचत पर मिलने वाला रिटर्न घट जाता है. अगर आपके पास घर या गाड़ी का लोन है, तो EMI में एक से दो प्रतिशत तक अतिरिक्त खर्च हो सकता है। इससे बजट बनाना मुश्किल हो जाता है, खासकर जब रोज़मर्रा के खर्च भी बढ़ रहे हों.
इसी तरह फिक्स्ड डिपॉज़िट या बचत खाते की ब्याज दरें अगर कम रहें तो आपका पैसा वैसा नहीं बढ़ पाएगा जितना आप चाहते हैं. इसलिए उच्च ब्याज दरों का असर सिर्फ लोन तक ही सीमित नहीं रहता, यह पूरी वित्तीय योजना को प्रभावित करता है.
ब्याज बचत के आसान टिप्स
1. रिफाइनेंसिंग पर विचार करें – कई बैंक या फाइनेंशियल कंपनी कम दरों पर रिफाइनेंस का ऑफ़र देती हैं। अगर आप अपना लोन मौजूदा उच्च ब्याज से कम दर वाले प्लान में बदल दें तो EMI में तुरंत फर्क दिखेगा.
2. स्मॉल एंट्री पेमेंट – हर महीने थोड़ी अतिरिक्त राशि लोन पर जमा करें। इससे मूलधन जल्दी घटता है और कुल ब्याज कम होता है.
3. क्रेडिट स्कोर सुधारे – आपका क्रेडिट स्कोर जितना अच्छा होगा, बैंक उतनी ही बेहतर रेट दे सकता है. समय पर EMI चुकाना, लेट फीस नहीं देना और अनावश्यक कर्ज न लेना इसको सुधारता है.
4. बचत खाते में हाई यील्ड विकल्प देखें – अगर आप बचत कर रहे हैं तो ऐसे बैंक चुनें जो उच्च ब्याज दर देती हो। इससे आपके पैसे पर भी अच्छा रिटर्न मिलेगा, जबकि लोन की लागत घटेगी.
5. बजट बनाकर खर्च कम करें – एक साधारण बजट तैयार करके अनावश्यक खर्च काटें। बची हुई रकम को या तो लोन पर पहले से चुकाएँ या उच्च रिटर्न वाली निवेश योजनाओं में डालें.
उच्च ब्याज दरों के समय में सबसे जरूरी है अपने वित्तीय प्लान की पूरी समीक्षा करना. अगर आप इन छोटे-छोटे कदमों को अपनाते हैं, तो बड़े बोझ को हल्का किया जा सकता है और भविष्य सुरक्षित बनता है.
