शोध अनुदान: क्या है, कौन देता है और कैसे पाएँ?

अगर आप वैज्ञानिक प्रोजेक्ट या सामाजिक अध्ययन कर रहे हैं तो शोध अनुदान आपके काम को तेज़ बना सकता है। सरकार, निजी फाउंडेशन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां हर साल लाखों रुपये के ग्रांट्स देती हैं। सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि कौन‑सी स्कीम आपके विषय से जुड़ी हुई है।

सबसे लोकप्रिय अनुदान स्रोत

भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और भारत विज्ञान परिषद (CSIR) जैसी संस्थाएँ प्रमुख हैं। इनके अलावा टाटा ट्रस्ट, सॉफ़्टबैंक फाउंडेशन और यूरोपीय संघ भी बड़े पैमाने पर फंडिंग देते हैं। अक्सर ये स्कीमें वेबसाइट या नोटिफिकेशन के माध्यम से घोषित होती हैं, इसलिए नियमित रूप से rrgears.in पर चेक करना फायदेमंद रहता है।

आवेदन कैसे करें – चरण‑दर‑चरण गाइड

1. **स्कीम का चयन**: अपने प्रोजेक्ट के लक्ष्य और बजट को मिलाकर सबसे उपयुक्त अनुदान चुनें।
2. **दस्तावेज़ तैयार करें**: प्रोजेक्ट प्रोफ़ाइल, कार्य‑योजना, बजट ब्रेकडाउन और पिछले काम की रिपोर्ट जरूरी हैं।
3. **ऑनलाइन फॉर्म भरें**: अधिकांश ग्रांट्स के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर करना पड़ेगा। फ़ॉर्म में सटीक जानकारी दें; छोटी सी गलती भी डिस्क्वालिफ़ाई कर सकती है।
4. **समीक्षा और सबमिशन**: सभी फाइलें PDF या DOCX में अपलोड करें, फिर समीक्षा के लिए भेजें।

ध्यान रखें—समय सीमा से पहले जमा करना सबसे अच्छा रहता है। कई बार अनुदान के लिये दो‑तीन राउंड होते हैं; पहली अस्वीकृति का मतलब आख़िरी नहीं है। आप फीडबैक लेकर सुधार कर फिर से अप्लाई कर सकते हैं।

यदि आपको आगे की मदद चाहिए तो रोज़ रिपोर्टर पर उपलब्ध विशेषज्ञों के साथ संपर्क करें। हम आपके प्रश्नों का त्वरित उत्तर देते हैं और सफल आवेदन के टिप्स साझा करते हैं। अब देर न करें, अपना प्रोजेक्ट फंडिंग से सशक्त बनाइए!

दिल्ली सरकार का शोध अनुदानों और ₹2000 से कम ऑनलाइन लेन-देन पर जीएसटी का विरोध: आतिशी

दिल्ली सरकार का शोध अनुदानों और ₹2000 से कम ऑनलाइन लेन-देन पर जीएसटी का विरोध: आतिशी

दिल्ली के वित्त मंत्री आतिशी ने घोषणा की है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार केंद्रीय सरकार के उन दो प्रस्तावों का कड़े शब्दों में विरोध करेगी जो 54वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में सामने आएंगे। एक प्रस्ताव में शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाले शोध अनुदानों पर जीएसटी लगाने का और दूसरे में ₹2000 से कम ऑनलाइन लेन-देन पर जीएसटी लागू करने का प्रस्ताव शामिल है।