सी-295 विमान: क्या है, क्यों महत्वपूर्ण है?

सी-295 एक टैक्टिकल ट्रांसपोर्टर है जो सेना, फौज और नागरिक मिशनों में काम आता है। इसकी क्षमता 9 टन तक का सामान ले जा सकती है या 15 सिपाहियों को हवा में उतार‑संतुड़ कर सकता है। भारत ने इसे अपनी जरूरतों के हिसाब से कस्टमाइज़ किया है, इसलिए यह भारतीय परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन देता है।

मुख्य विशेषताएँ और तकनीकी डेटा

सी-295 का पावरट्रेन दो टर्बोशाफ्ट इंजन से चलाया जाता है, जिससे इसे छोटे रनवे पर भी लैंड‑लिफ्ट करने की सुविधा मिलती है। इसकी रेंज लगभग 1,200 किलोमीटर है, और मैक्सिमम क्रूज़ स्पीड 250 किमी/घंटा है। इस वि‍मान में साइड डोर और रूफ हिचरी दोनों हैं, जिससे कार्गो लोडिंग आसान हो जाती है। एवीओनिक्स सिस्टम नवीनतम नेविगेशन और कम्यूनिकेशन को सपोर्ट करता है, इसलिए आपदा राहत या युद्ध के समय भी सुरक्षित संचालन सम्भव होता है।

भारत में सी-295 का उपयोग: वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाएँ

भारतीय वायुसेना ने पहले ही कई सी-295 खरीदे हैं और उन्हें विभिन्न बेसों पर तैनात किया है। ये विमान विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों, जैसे जम्मू‑कश्मीर या उत्तराखंड में उपयोगी साबित हुए हैं जहाँ हेलीकॉप्टर का संचालन कठिन होता है। हाल के वर्षों में सरकार ने सी-295 को मानवतावादी मिशन में भी इस्तेमाल करने की योजना बनायी है, जैसे बाढ़ राहत और पर्वतीय आपदा में सामान पहुँचाना। भविष्य में भारत इस मॉडल को स्थानीय उद्योगों से लाइसेंस‑प्रोड्यूस करवा रहा है, जिससे रोजगार के साथ-साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। इससे रखरखाव की लागत भी घटेगी और सप्लाई चेन मजबूत होगी।

अगर आप एयरोस्पेस या रक्षा उद्योग में काम करते हैं तो सी-295 को समझना आपके लिए फायदेमंद है। यह विमान कई मिशनों के लिये बहुमुखी है, और भारतीय परिस्थितियों में इसकी प्रभावशीलता लगातार बढ़ रही है। रोज़ रिपोर्टर पर हम इस विषय से जुड़ी ताज़ा ख़बरें, विशेषज्ञों की राय और तकनीकी विश्लेषण लाते रहेंगे, तो बने रहें हमारे साथ!

भारत में सी-295 सैन्य विमान निर्माण: टाटा-एयरबस का अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट

भारत में सी-295 सैन्य विमान निर्माण: टाटा-एयरबस का अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस डिफेंस एवं स्पेस का भारत में सी-295 सैन्य विमान बनाने हेतु एक बड़ा सहयोग हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर 2022 को वडोदरा, गुजरात में निर्माण संयंत्र की आधारशिला रखी। इस परियोजना के अंतर्गत पहले 16 विमान एयरबस द्वारा 'फ्लाई अवे' स्थिति में प्रदान किए जाएंगे, जबकि अगला उत्पादन संयंत्र Vadodara में स्थापित होगा।