करदाताओं की राहत: टैक्स बचत के आसान कदम

हर साल टैक्‍स रिटर्न भरते‑भरते थक जाते हैं? अगर आप भी चाहते हैं कि आपका पैसा ज्यादा से ज्यादा आपके पास रहे, तो यहाँ कुछ सरल उपाय दिए गए हैं जो आपकी कर देनदारी को घटा सकते हैं। हम बात करेंगे 2025 की नई छूटों के बारे में और साथ ही साल‑भर कैसे प्लानिंग करनी चाहिए, इस पर भी चर्चा करेंगे।

2025 की प्रमुख कर रियायतें

पिछले कुछ महीनों में बजट में कई ऐसी घोषणाएँ हुईं जो सीधे आपके जेब को बचाएँगी। सबसे पहले, सेक्शन 80C की सीमा अब 1.8 लाख रुपए तक बढ़ा दी गई है। इसका मतलब है कि आप जीवन बीमा, PPF या ELSS जैसी निवेश योजनाओं में इस राशि तक का कर कटौती ले सकते हैं।

दूसरा बड़ा बदलाव है हाउस प्रॉपर्टी के लिए टैक्स डिडक्शन. अगर आप किराए पर दे रहे हैं तो अब 30% की फ्लैट डिडक्शन मिलती है, चाहे actual expenses कुछ भी हों। इससे आपके रेंट‑आधारित आय पर कर कम लगेगा।

साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेक्शन 80D में अतिरिक्त 25 हजार रुपए का कटौती जोड़ दिया गया है, जिससे स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम का भार काफी हल्का हो जाता है। अगर आप अपने माता‑पिता या दादा‑दादी को कवर कराते हैं तो ये रियायत आपके परिवार को सीधे मदद करेगी।

हर साल कैसे करें टैक्स प्लानिंग?

राहत पाने के लिए सिर्फ़ साल की आखिरी मिनट में फॉर्म भरना नहीं चाहिए। शुरूआती कदम आसान हैं: सबसे पहले अपने सभी आय स्रोतों का एक लिस्ट बनाएं – सैलरी, फ्रेंचाइज़, किराया आदि। फिर उन पर लागू हो सकने वाले कटौतियों को नोट करें।

दूसरा, निवेश को टाइम‑लाइन के हिसाब से बांटें। अगर आप साल की शुरुआत में 80C या 80D के तहत निवेश करेंगे तो पूरे वर्ष का लाभ आपको मिलेगा और साथ ही चक्रवृद्धि ब्याज भी बढ़ेगा।

तीसरा, टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले सभी डिडक्शन प्रमाणपत्र एक जगह रख लें – बीमा पॉलिसी सर्टिफिकेट, बैंक स्टेटमेंट, मेडिकल बिल आदि। इससे फॉर्म भरते‑भरते समय बार‑बार खोजने का झंझट नहीं रहेगा।

अंत में, अगर आपके पास जटिल आय जैसे शेयर ट्रेडिंग या फ्रेंचाइज़ के प्रॉफिट हैं तो टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेना समझदारी होगी। एक छोटा प्रोफ़ेशनल फ़ीसेस आपको बड़ी बचत दिला सकता है।

इन आसान तरीकों को अपनाकर आप न केवल अपना टैक्स बोझ घटाएंगे, बल्कि वित्तीय स्थिरता भी बना पाएँगे। याद रखें, हर साल थोड़ी‑थोड़ी योजना से बड़ी राहत मिलती है – बस शुरूआत सही समय पर करें।

GST करदाताओं के लिए बड़ी राहत: 1 नवंबर 2024 से मांगों पर नहीं लगेगा ब्याज व जुर्माना

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भारत की GST अमनेस्टी योजना, 1 नवंबर 2024 से लागू, गैर-धोखाधड़ी वाली GST मांगों पर ब्याज और जुर्माना माफ करती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच की मांगों के लिए यह छूट है, जिसमें करदाताओं को 31 मार्च 2025 तक मूल कर चुकाना अनिवार्य है। धोखाधड़ी मामलों पर छूट लागू नहीं है और आवेदन 30 जून 2025 तक जमा करना होगा।