
भारतीय वायु सेना – क्या नया है?
अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ़ लड़ाकू जेट ही एयर फ़ोर्स की पहचान है, तो एक बार पढ़िए ये लेख. भारतीय वायु सेना ने पिछले साल कई बड़े कदम उठाए हैं – नई फाइटर डिग्री, इंडियन एयरोनॉटिक्स का बूस्ट और अंतरराष्ट्रीय सहयोग। इन सबका असर सीधे आपके रोज़मर्रा के सुरक्षा माहौल पर पड़ता है.
नई विमानों की बात
2024 में तेज़ी से डेलिवर्ड हुए तेजस वायुसेना फ़ाइटर जेट ने स्काई को और भी सुरक्षित बना दिया. ये जेट 5G‑कंट्रोल, एआई‑आधारित लक्ष्य पहचान और इलेक्ट्रिक थ्रस्ट वैरीएबल टेक्नोलॉजी से लैस हैं. साथ ही हिंदी संस्करण के HAL‑डिवाइस ने भारत में पहला पूरी तरह घरेलू निर्मित बेज़र सपोर्टेड ड्रोन तैयार किया, जिसे अब सर्विसिंग बेस पर तेज़ी से अपग्रेड किया जा रहा है.
एक और बड़ी खबर: आरजेएएफ‑इंडियन प्रोजेक्ट के तहत 50 अतिरिक्त मिराज फ़ाइल्ड टर्नर को भारतीय एयरोस्पेस कंपनी ने असेंबली लाइन पर स्थापित किया. इससे न केवल लागत घटेगी, बल्कि रख‑रखाव का समय भी कम होगा.
प्रशिक्षण और रणनीति
विमानों की तकनीक जितनी तेज़, उतना ही महत्वपूर्ण है पायलटों का प्रशिक्षण. इस साल इंडियन एयर कॉम्बैट अकादमी (IACA) ने सिम्युलेटर‑आधारित VR कोर्स शुरू किया जो वास्तविक लड़ाई की स्थितियों को 3D में दिखाता है. इससे पायलट तेज़ी से निर्णय ले सकते हैं और जोखिम कम होता है.
रणनीतिक स्तर पर, भारतीय वायु सेना ने साउथ एशिया एयर डिफेंस नेटवर्क (SAADN) के साथ सहयोग बढ़ाया है. इस साझेदारी में रडार शेयरिंग, सामुदायिक इंटेलिजेंस और संयुक्त अभ्यास शामिल हैं. परिणामस्वरूप सीमा‑पार खतरों की पहचान पहले से तेज़ हो गई है.
आगे देखते हुए, रक्षा मंत्रालय ने 2030 तक इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड एअरक्राफ्ट के लिए बुनियादी ढाँचा तैयार करने का लक्ष्य रखा है. इसका मतलब होगा कम फ्यूल खर्च और पर्यावरणीय प्रभाव में कमी – दो‑बिंदु वाली जीत.
तो, क्या आप समझे अब? भारतीय वायु सेना सिर्फ़ लड़ाकू जेट नहीं, बल्कि एक पूरी इकोसिस्टम चलाती है जिसमें टेक्नोलॉजी, प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिलकर काम करता है. इस विकास को देखते हुए भविष्य में हमें अधिक सुरक्षित आसमान और तेज़ी से विकसित रक्षा क्षमताएँ देखने को मिलेंगी.
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