भारतीय सैन्य पायलट – क्या चाहिए और कैसे शुरू करें?

अगर आप हमेशा से सोचे हैं कि हवा में बत्तखों की तरह नहीं, बल्कि जेट के पंखों पर उड़ना चाहते हैं, तो भारतीय एयर फ़ोर्स (IAF) का रास्ता देखें। यहां पायलट बनना सिर्फ सपनों को सच करने जैसा नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और सही योजना की जरूरत है। चलिए, आसान भाषा में समझते हैं कि इस सफर में कौन‑कौन से कदम आते हैं।

सेलेक्शन प्रोसेस – किसको मिलता है मौका?

मुख्य दो रास्ते होते हैं: NDA (नेशनल डिफेंस अकादमी) और AFCAT (एयर फ़ोर्स कॉमन्स एडमिशन टेस्ट)। NDA में 12वीं के बाद दाखिला मिलता है, जबकि AFCAT के लिए स्नातक होना जरूरी है। दोनों ही परीक्षा में लिखित टेस्ट, सिविल एवियोनिक्स टेस्‍ट और सर्वाइवल स्किल्स टेस्ट शामिल हैं। अगर आप इन सब को पास कर लेते हैं तो आगे SSB इंटरव्यू आता है जहाँ शारीरिक फिटनेस, मनोवैज्ञानिक प्रोफ़ाइल और टीम वर्क देखी जाती है।

ध्यान रखें: वजन‑ऊँचाई मानक, 5 किमी रन में 25 मिनट से कम समय, और बेसिक मेडिकल टेस्ट पास होना ज़रूरी है। इन सब को पूरा करने के बाद ही आप पायलट प्रशिक्षण की ओर बढ़ेंगे।

ट्रेनिंग और रोज़मर्रा की जिंदगी – क्या होता है असली कक्षा?

इंडियन एअर फ़ोर्स अकादमी (IAFA) में दो साल का बुनियादी प्रशिक्षण होता है। पहले छह महीने सिम्युलेटर, फिजिकल फिटनेस और बेसिक इयरोनॉटिक्स पर ध्यान देते हैं। फिर आप फ्लाइट स्कूल में जाते हैं जहाँ Cessna 152 जैसे हल्के प्लेन से शुरुआती उड़ानें भरते हैं। हर हफ्ता नए टास्क, डेडलाइन्स और फ़्लाइट लॉगबुक अपडेट होते रहते हैं।

ट्रेनिंग के बाद आप advanced jets जैसे MiG‑21 या तेज़ी से आने वाले HAL Tejas पर सिखाए जाते हैं। यहाँ रूटीन में सुबह 5 बजे उठकर जिम, फिर ग्राउंड स्कूल, उसके बाद दो घंटे की फ़्लाइट और शाम को डीब्रिफ़ होता है। बोर नहीं लगता क्योंकि हर मिशन अलग रहता है – कभी एअरलॉन्ग, कभी वॉटर‑ड्रॉप ऑपरेशन।

पायलट बनने के बाद भी सीखते रहना पड़ता है। नियमित मेंटेनेंस ड्रिल, नई टेक्नोलॉजी अपडेट और सिम्युलेशन टास्क रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनते हैं। इस काम में टीमवर्क बहुत मायने रखता है; एक पायलट अकेला नहीं उड़ता, पूरे ग्राउंड क्रू के सहयोग से ही मिशन सफल होता है।

कई बार आप देखेंगे कि भारतीय पायलट सिर्फ जेट नहीं, बल्कि हेलिकॉप्टर, ड्रोन और टैंक भी संभालते हैं। इसलिए बहुमुखी स्किल्स होना फायदेमंद रहता है। यदि आपके पास इंजीनियरिंग या एयरोडायनामिक्स में ज्ञान है तो आगे की करियर ग्रोथ तेज़ होती है।

कुछ प्रसिद्ध पायलटों के नाम याद रखिए – Squadron Leader Rakesh Sharma, जो पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने; Wing Commander Abhinandan Varthaman, जिनकी लैंडिंग ने पूरे देश को गर्व से भर दिया; और आज की नई पीढ़ी जैसे Flight Lieutenant Shivam Singh, जिन्होंने recent operations में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इनके अनुभव पढ़ना, वीडियो देखना या उनसे मिलकर सीखना आपकी तैयारी को बहुत मदद करेगा।

अगर आप अभी भी सोच रहे हैं कि यह रास्ता आपके लिए है या नहीं, तो एक छोटा ट्राय करें – अपने निकटतम एयरो क्लब में सिंगल‑एयरक्राफ्ट रेंट करके टेस्ट फ़्लाइट लीजिए। इससे आपको असली उड़ान का स्वाद मिलेगा और पता चलेगा कि आपका दिल इस काम के लिये धड़कता है या नहीं।

अंत में, याद रखें: पायलट बनना आसान नहीं, पर अगर आप लक्ष्य को साफ़ रखेंगे, नियमित ट्रेनिंग करेंगे और अपने हेल्थ रिकॉर्ड को टॉप फॉर्म में रखेंगे तो आसमान आपके कदमों का इंतज़ार कर रहा होगा। सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए हर दिन एक नई चुनौती ले आएं – यही है भारतीय सैन्य पायलट की असली कहानी।

मालदीव में भारतीय सैन्य पायलटों द्वारा अनधिकृत ऑपरेशन नहीं: उच्चायोग

मालदीव में भारतीय सैन्य पायलटों द्वारा अनधिकृत ऑपरेशन नहीं: उच्चायोग

मालदीव में भारतीय उच्चायोग ने मालदीव के रक्षा मंत्री गस्सान मौमून द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि 2019 में मालदीव में तैनात भारतीय सैन्य हेलीकॉप्टर पायलटों ने अनधिकृत ऑपरेशन किए थे। उच्चायोग ने कहा कि मालदीव में सभी भारतीय विमानन ऑपरेशन सहमत प्रक्रियाओं के अनुसार और मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (MNDF) के विधिवत अधिकार के साथ किए गए हैं।