बजाज ऑटो के सबसे हालिया अपडेट – क्या नया है?

क्या आप बजाज ऑटो के नए मॉडल या प्रोमोशन का इंतज़ार कर रहे हैं? यहाँ पर हम आपको आज की मुख्य ख़बरों का सारांश देंगे, जिससे आपको तुरंत पता चल जाएगा कि बाजार में क्या धूम मचा रहा है।

नए लॉन्च और फीचर अपडेट

बजाज ने हाल ही में अपनी नई पेट्रोल‑इलेक्ट्रिक स्कूटर ‘पैसेंजर+’ का प्री‑ऑर्डर खोल दिया है। इस मॉडल में 25 किमी/घंटा की टॉप स्पीड और 150 किमी रेंज मिलने वाली है, जो शहरी यात्रियों के लिए खास बनाती है। साथ ही, कंपनी ने एबीएस (एंटी‑ब्लॉकिंग सिस्टम) को सभी नए दोपहिया वाहनों पर फ्री में दिया है – यह सुरक्षा का बड़ा कदम है।

अगर आप राइडर या ट्रैवलर की बात कर रहे हैं, तो बजाज के ‘ट्रैक्टर 150’ में अब बेहतर इंधन दक्षता और कम रख‑रखाव खर्च वाले इंजन लगे हैं। इस अपडेट से किसानों को सालाना लगभग 10 % ईंधन बचत का फायदा मिलेगा।

बजाज की बिक्री रणनीति और बाजार स्थिती

पिछले महीने बजाज ने अपने डीलर नेटवर्क में 12 % विस्तार किया है, जिससे छोटे शहरों तक पहुंच आसान हो गई है। इस कदम से कंपनी ने पहले ही तीस‑सत्तर लाख यूनिट्स बेच कर रिकॉर्ड तोड़ दिया है। साथ ही, मौसमी छूट और ‘फ्री हेल्थ चेकअप’ ऑफ़र ग्राहकों को आकर्षित करने में कामयाब रहे हैं।

बजाज की स्टॉक कीमत भी इस बढ़त के कारण 8 % ऊपर गई है, जो निवेशकों को भरोसा देती है कि कंपनी भविष्य में भी ग्रोथ पर फोकस रखेगी। अगर आप शेयर मार्केट में बजाज ऑटो के शेयर खरीदने का सोच रहे हैं तो अभी का समय बेहतर माना जा रहा है।

एक और बात—बजाज ने नई ई‑कोम्पोनेंट सप्लाई चेन सेटअप की घोषणा की है, जिससे बैटरी लागत घटेगी और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की कीमतें अधिक किफ़ायती होंगी। इस पहल से भारत में इलेकट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा मिलने की संभावना है।समाप्ति पर यही कहूँगा कि बजाज ऑटो न केवल अपने क्लासिक मोटरसाइकिलों के लिए जाना जाता है, बल्कि इलेक्ट्रिक और सुरक्षा तकनीक में भी अग्रणी बन रहा है। अगर आप नई खरीदारी या निवेश का सोच रहे हैं तो इन अपडेट्स को ध्यान में रखें—हर कदम पर बजाज कुछ नया लेकर आता है।

बजाज ऑटो के शेयरों में भारी गिरावट: कमजोर तिमाही प्रदर्शन का असर

बजाज ऑटो के शेयरों में भारी गिरावट: कमजोर तिमाही प्रदर्शन का असर

बजाज ऑटो के शेयरों में 13% की गिरावट देखी गई, जो कमजोर Q2 प्रदर्शन के कारण हुई। कंपनी के समेकित शुद्ध लाभ में 31.4% की कमी आई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ी। अन्य ऑटो कंपनियों पर भी इसका प्रभाव पड़ा। ब्रोकरेज हाउसों ने भी अलग-अलग दृष्टिकोण पेश किए हैं।