
AWACS क्या है? आसान भाषा में समझें
जब आप टीवी पर या सोशल मीडिया पे ‘एयरवर्थनेस’ शब्द देखते हैं, तो अक्सर AWACS का जिक्र सुनते हैं। यह एक बड़ी रडार प्रणाली है जो विमान पर लगी रहती है और पूरे आसमान को स्कैन करती है। भारत में इसका उपयोग मुख्यतः सेना की निगरानी, सीमा सुरक्षा और हवाई अभियानों के समन्वय में होता है।
AWACS के काम करने का तरीका
एक AWACS विमान में रडार डोम (जैसे बड़े बॉल) लगा रहता है जो 360 डिग्री कवरेज देता है। यह सैकड़ों किलोमीटर तक की ऊँचाई से दुश्मन विमानों, मिसाइलों और ड्रोन को पकड़ सकता है। डेटा तुरंत ग्राउंड कंट्रोल को भेजा जाता है, जिससे कम समय में निर्णय लिया जा सके। यही कारण है कि भारत ने अपने ‘रिवाल’ प्रोजेक्ट में AWACS का महत्त्व बढ़ाया है।
भारत में AWAMS की वर्तमान स्थिति
अभी तक भारत के पास दो बड़े AWACS विमान हैं, जो रशियन ए-50 और अमेरिकी E‑3 Sentry मॉडल पर आधारित हैं। ये दोनों ही विभिन्न मोर्चों पर तैनात होते हैं—कश्मीर, समुद्री सीमा और उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय वायु सेना ने इन विमानों को नई सॉफ्टवेयर अपग्रेड दिया है जिससे रडार की रेज़ॉल्यूशन बढ़ गई है और कम दूरी पर भी लक्ष्यों को पहचानना आसान हुआ है।
अगर आप सोच रहे हैं कि ये तकनीक आम लोगों के लिए क्यों मायने रखती है, तो समझिए – जब हवाई सुरक्षा बेहतर होती है, तो देश में शांति भी बनी रहती है। साथ ही, AWACS की मदद से सिविल एयर ट्रैफिक कंट्रोल को भी लाभ मिलता है; एक ही रडार सिस्टम से नागरिक विमानों की निगरानी आसान हो जाती है।
भविष्य में भारत के लिए और अधिक आधुनिक AWACS प्लेटफ़ॉर्म लाने की योजनाएँ हैं, जैसे कि घरेलू विकास पर काम चल रहा है। इससे न केवल आयात खर्च कम होगा बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी। इस दिशा में रक्षा मंत्रालय ने कई स्टार्ट‑अप्स को सहयोग दिया है, ताकि एआई आधारित रडार एनालिसिस जल्दी से लागू हो सके।
तो, यदि आप AWACS के बारे में नवीनतम अपडेट चाहते हैं, तो रोज़ रिपोर्टर की इस टैग पेज पर बने रहें। यहाँ आपको हर नई घोषणा, परीक्षण और तकनीकी विश्लेषण का सार मिल जाएगा – बिना जटिल शब्दों के, सिर्फ़ साफ़‑साफ़ जानकारी.
