अफगानिस्तान ने बांग्लादेश को 3-0 से हराकर वनडे सीरीज पर किया कब्जा, जादरान और राशिद खान ने बनाया रिकॉर्ड
नव॰, 2 2025
अफगानिस्तान क्रिकेट टीम ने बांग्लादेश के खिलाफ एक ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरी एशियाई क्रिकेट दुनिया को हैरान कर दिया। अफगानिस्तान क्रिकेट टीम ने 11 अक्टूबर 2025 को अबू धाबी के शेख जायेद स्टेडियम में तीन मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले में 81 रनों से जीत दर्ज की — और तीसरे मैच में 200 रनों से बड़ी जीत के साथ सीरीज को 3-0 से क्लीन स्वीप कर लिया। ये सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि एक संदेश था: अफगानिस्तान अब सिर्फ उम्मीद नहीं, बल्कि खतरा बन चुका है।
जादरान की बल्लेबाजी ने बदल दी गेम की दिशा
दूसरे मैच में इब्राहिम जादरान ने जो किया, वो बस एक शानदार पारी नहीं थी — ये एक नेतृत्व का प्रदर्शन था। 95 रन की पारी, जिसमें उन्होंने सिर्फ 3 गलतियाँ कीं, बांग्लादेश के गेंदबाजों को अपने बल्ले से चुनौती देने का सबसे साफ तरीका था। और तीसरे मैच में उन्होंने फिर वही किया — 111 गेंदों में 95 रन, 7 चौके, 2 छक्के। एक ऐसा बल्लेबाज जो पिच की स्थिति को नहीं डराता, बल्कि उसे अपना बना लेता है।
लेकिन जादरान के बिना भी अफगानिस्तान की टीम ने बेहतरीन बल्लेबाजी दिखाई। मोहम्मद नबी ने तीसरे मैच में 62 रन नाबाद बनाए, जबकि रहमनुल्लाह गुरबाज और रहमत शाह ने पहले मैच में शुरुआती ओवरों में टीम को स्थिर कर दिया। चार पार्टनरशिपें 30+ रन की लगीं — बांग्लादेश की टीम ने तो 30 रन की भी नहीं बनाई।
राशिद खान: जब एक गेंद बन जाए अंतिम गेंद
अगर जादरान बल्ले से जीत लाए, तो राशिद खान ने गेंद से बांग्लादेश की टीम को नष्ट कर दिया। दूसरे मैच में उन्होंने 8.3 ओवर में सिर्फ 17 रन दिए और 5 विकेट लिए — इकोनॉमी रेट 2.00! उन्होंने तौहीद हृदोय, नूरुल हसन, तंजीम हसन साकिब, रिशाद हुसैन और तनवीर इस्लाम को एक-एक करके आउट किया। बांग्लादेश के बल्लेबाज अपने बल्ले से नहीं, बल्कि अपने दिमाग से खेल रहे थे — क्या अगली गेंद बाउंस होगी? क्या ये स्पिन नहीं होगी?
तीसरे मैच में भी उन्होंने 3 विकेट लिए, जबकि बिलाल समी ने 5 विकेट चटकाए। बांग्लादेश की टीम 294 के लक्ष्य का पीछा करते हुए सिर्फ 93 रन पर ऑलआउट हो गई — जिसमें उनके टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज एक भी दोहरा स्कोर नहीं बना पाए।
एक टीम का जन्म, एक टीम का अंत
बांग्लादेश की टीम ने अपनी आत्मा खो दी। उनके बल्लेबाज बिना किसी रणनीति के खेल रहे थे। उनके गेंदबाज भी बिना किसी विचार के गेंद फेंक रहे थे। मेहिदी हसन मिराज ने तीन विकेट लिए, लेकिन उनकी टीम का नेतृत्व टूट चुका था। ये सिर्फ एक बुरी पारी नहीं थी — ये एक निर्माण की गलती थी।
अफगानिस्तान की टीम ने बिल्कुल विपरीत किया। उनके बल्लेबाज ने धैर्य रखा। उनके गेंदबाज ने दबाव बनाया। उनके कप्तान ने निर्णय लिए — और उनके खिलाड़ी ने उन्हें अंजाम दिया। ये टीम अब अपने खिलाड़ियों को नहीं, बल्कि अपने खेल को जानती है।
नबी का अनचाहा रिकॉर्ड: जब अनुभव भी बोझ बन जाए
लेकिन ये सफलता के साथ एक अजीब अंधेरा भी आया। 29 अक्टूबर 2025 को मोहम्मद नबी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20I मैच में सिर्फ दो गेंदों में आउट होकर अपने लिए एक अनचाहा रिकॉर्ड बना दिया — अफगानिस्तान के लिए टी20I में सबसे ज्यादा बार डक पर आउट होने वाले बल्लेबाज। 143 मैचों में 9 बार डक! ये रिकॉर्ड उनके अनुभव का नहीं, बल्कि उनके बल्ले के अस्थिरता का प्रतीक है।
नबी अभी भी टीम के लिए जरूरी हैं। उनकी गेंदबाजी और अनुभव अभी भी कीमती हैं। लेकिन जब एक खिलाड़ी 40 साल का हो जाए और उसका बल्ला अपने अतीत को थामे रहे, तो वह एक बोझ बन सकता है। अफगानिस्तान को अब उनके बाद की योजना बनानी होगी।
अगला कदम: विश्व कप की राह
इस सीरीज की जीत के बाद अफगानिस्तान की टीम अब विश्व कप की बात कर रही है। वे अब एशिया के टॉप 4 में शामिल होने की बात कर रहे हैं। अगर जादरान और राशिद खान अपना प्रदर्शन बरकरार रखते हैं, तो वे 2027 के विश्व कप के लिए एक खतरनाक टीम बन सकते हैं। उनकी टीम में अब न सिर्फ ताकत है, बल्कि दिमाग भी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अफगानिस्तान ने बांग्लादेश के खिलाफ किस तरह की रणनीति अपनाई?
अफगानिस्तान ने बल्लेबाजी में स्थिरता और गेंदबाजी में दबाव बनाने पर फोकस किया। जादरान और नबी जैसे खिलाड़ियों ने शुरुआती ओवरों में आधार बनाया, जबकि राशिद खान और बिलाल समी ने बांग्लादेश के बल्लेबाजों को बिना आधार के बाहर कर दिया। पिच की कठिनाई को उन्होंने अपने फायदे में बदल लिया।
राशिद खान की इकोनॉमी रेट 2.00 क्यों इतनी खास है?
2.00 की इकोनॉमी रेट टी20 या वनडे दोनों में बेहद दुर्लभ है — खासकर जब 5 विकेट लिए जाएं। इसका मतलब है कि राशिद ने हर ओवर में सिर्फ दो रन दिए, जबकि बांग्लादेश के बल्लेबाज लगातार आउट हो रहे थे। ये गेंदबाजी का एक आदर्श नमूना है — नियंत्रण, सटीकता और दबाव का संगम।
बांग्लादेश की टीम की कमजोरी क्या थी?
बांग्लादेश की टीम का सबसे बड़ा दोष बल्लेबाजी का अनुशासन न होना था। उनके टॉप ऑर्डर के खिलाड़ियों ने कोई भी साझेदारी नहीं बनाई। अधिकांश बल्लेबाज शुरुआती ओवरों में ही आउट हो गए। उनके गेंदबाज भी लगातार बाउंस या लाइन गलत फेंक रहे थे, जिससे अफगानिस्तान के बल्लेबाज आराम से रन बना पाए।
मोहम्मद नबी का डक रिकॉर्ड क्या बताता है?
यह रिकॉर्ड नबी के अनुभव के बजाय उनके बल्लेबाजी में अस्थिरता को दर्शाता है। वे 143 मैचों में 9 बार बिना रन बनाए आउट हुए — जो एक बड़ी चिंता का विषय है। इससे पता चलता है कि उनका बल्ला अब अतीत की यादों को थामे रहा है, न कि वर्तमान के दबाव को संभाले।
अफगानिस्तान की टीम अगले किस टूर्नामेंट में खतरा बन सकती है?
अगर जादरान और राशिद खान अपना फॉर्म बरकरार रखें, तो अफगानिस्तान 2027 के विश्व कप में एक खतरनाक टीम बन सकती है। वे अब एशिया के टॉप 4 में शामिल होने की उम्मीद लिए जा रहे हैं। उनकी टीम में अब ताकत के साथ रणनीति भी है — जो पिछले सालों में नहीं थी।
क्या इस जीत से अफगानिस्तान की टीम को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलेगा?
हाँ। इस 3-0 क्लीन स्वीप ने अफगानिस्तान की टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया दर्जा दिया है। अब उन्हें बड़ी टीमों के साथ बराबरी से खेलने का अधिकार मिला है। आईसीसी के रैंकिंग में भी उनकी जगह ऊपर चढ़ चुकी है, और वे अब विश्व कप के लिए एक गंभीर उम्मीदवार बन गए हैं।
Pushkar Goswamy
नवंबर 4, 2025 AT 08:24अफगानिस्तान ने बांग्लादेश को 3-0 से हराया? ये तो बस एक जीत नहीं, एक क्रांति है। बांग्लादेश के बल्लेबाज तो ऐसे खेल रहे थे जैसे उनके बल्ले में बिजली नहीं आई हो। राशिद खान की गेंदें तो बस डराने नहीं, बल्कि नियंत्रित करने के लिए आ रही थीं।
Andalib Ansari
नवंबर 5, 2025 AT 23:13इस जीत के पीछे केवल तकनीक नहीं, बल्कि एक नए विचार का जन्म हुआ है। अफगानिस्तान ने यह साबित किया कि आकार या इतिहास नहीं, बल्कि दिमाग और धैर्य जीतता है। जादरान ने बल्ले से नहीं, अपने दिमाग से खेला। और राशिद ने गेंद से नहीं, अपने दिल से गेंद फेंकी।
Pooja Shree.k
नवंबर 6, 2025 AT 09:00मैं तो बस देख रही थी, और लगा जैसे कोई फिल्म चल रही हो। जादरान की पारी देखकर मेरी आँखें भर आईं। बांग्लादेश के बल्लेबाज तो बस घबरा रहे थे। राशिद खान ने तो बस एक गेंद फेंकी और सब बैठ गए।
Vasudev Singh
नवंबर 7, 2025 AT 04:43अफगानिस्तान की टीम ने बिल्कुल सही तरीके से खेला। बल्लेबाजी में धैर्य, गेंदबाजी में दबाव, और कप्तानी में स्मार्टनेस। जादरान ने शुरुआत की, नबी ने बीच में आधार बनाया, और राशिद और बिलाल ने आखिर में टीम को जीत दिलाई। ये टीम किसी एक खिलाड़ी पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर टिकी है। बांग्लादेश की टीम तो बस एक बेकाबू भीड़ लग रही थी।
Akshay Srivastava
नवंबर 8, 2025 AT 07:58नबी का डक रिकॉर्ड एक अपमान है। 143 मैचों में 9 बार बिना रन के आउट? ये अनुभव नहीं, बल्कि अपराध है। उनकी गेंदबाजी अच्छी है, लेकिन बल्लेबाजी में वे अब बोझ बन चुके हैं। अफगानिस्तान को अब उन्हें बाहर निकालना चाहिए, न कि उनके नाम को इतिहास में दर्ज करना।
Amar Khan
नवंबर 8, 2025 AT 23:39राशिद खान तो असली जादूगर है... ये गेंदें जैसे जानती हैं कि कहाँ जानी हैं... बांग्लादेश के बल्लेबाज तो बस घबरा गए... मैंने तो टीवी बंद कर दिया... ये नहीं देखना चाहिए था... अफगानिस्तान के लिए ये जीत बहुत बड़ी है... बस उन्हें अब अपने आप को नहीं, अपने खेल को याद रखना है...
Roopa Shankar
नवंबर 10, 2025 AT 05:21मैं तो बहुत खुश हूँ। अफगानिस्तान ने जो किया, वो किसी बड़ी टीम के लिए भी बहुत मुश्किल है। जादरान ने बल्ले से दिखाया कि डर क्या होता है, और राशिद ने गेंद से दिखाया कि नियंत्रण क्या होता है। बांग्लादेश को ये नुकसान बड़ा है, लेकिन अफगानिस्तान के लिए ये एक शुरुआत है। अब वे दुनिया के सामने खड़े हो गए हैं।
shivesh mankar
नवंबर 11, 2025 AT 14:34अफगानिस्तान की ये जीत बस एक मैच नहीं, एक आत्मविश्वास की जीत है। जब एक देश जहाँ युद्ध और अंधेरा रहता है, वहाँ से इतना बड़ा खिलाड़ी निकलता है, तो ये दुनिया को एक संदेश देता है कि खेल शांति का रास्ता है। जादरान और राशिद खान अब बस खिलाड़ी नहीं, वो आशा के प्रतीक हैं।
avi Abutbul
नवंबर 12, 2025 AT 00:16नबी के बारे में बात कर रहे हो? वो अभी भी टीम के लिए जरूरी हैं। उनकी गेंदबाजी और अनुभव किसी नौजवान के लिए सबक है। डक रिकॉर्ड तो बस एक आंकड़ा है - उनकी टीम के लिए उनका मूल्य उससे बहुत ज्यादा है।
Hardik Shah
नवंबर 12, 2025 AT 03:38बांग्लादेश की टीम तो बस एक बेकार का ढेर है। उनके बल्लेबाज तो बिना सोचे खेल रहे थे। इस तरह की टीम को विश्व कप में भेजना ही गलत था। अफगानिस्तान ने इन्हें सच्चाई बता दी।
manisha karlupia
नवंबर 14, 2025 AT 00:28क्या अफगानिस्तान की ये जीत असली है? या बस एक अच्छा मौका? मैं तो थोड़ी डरी हुई हूँ... अगर अगले मैच में भी ऐसा ही होगा तो तब तो मैं मान जाऊँगी... लेकिन अभी तो लगता है जैसे कुछ अजीब हो रहा है...