
तुलसी विवाह क्या है? समझिए इस अनोखे रिवाज को
आपने शायद ‘तुलसी’ शब्द सुना होगा, पर क्या आप जानते हैं कि तुलसी विवाह एक खास हिंदू रीति‑रिवाज़ है? यह शादी नहीं, बल्कि एक सामाजिक और आध्यात्मिक समारोह है जहाँ घर की मुख्य महिला (आमतौर पर माँ या दादी) को "वधु" के रूप में सम्मानित किया जाता है। इस दिन वह अपने आप को परिवार की रानी मानती है और सभी सदस्य उसकी सेवा में जुटते हैं।
इतिहास और कारण
तुलसी विवाह का जड़ें प्राचीन वैदिक ग्रंथों में मिलती हैं, जहाँ दया, प्रेम और पारिवारिक एकता को बढ़ावा देने के लिए ऐसी रस्में बनायीं गई थीं। कई क्षेत्रों में इसे "विवाह सत्र" कहा जाता है क्योंकि यह महिलाओं की शक्ति और सम्मान को उजागर करता है।
मुख्य रीतियाँ क्या हैं?
रिवाज का क्रम सरल लेकिन भावनात्मक होता है:
- सजावट: घर में फूल, रंगीन कपड़े और तुलसी के पत्ते से सजा किया जाता है।
- वधु की तैयारी: दादी या माँ को नई पोशाक पहनाया जाता है, बालों में माला और हल्का मेकअप लगाया जाता है।
- आशीर्वाद: सभी सदस्य वधु को हाथ मिलाते हुए आशीर्वाद देते हैं, अक्सर तुलसी के पत्ते से उसकी थाली सजाते हैं।
- भोजन: विशेष पकवान तैयार किए जाते हैं – जैसे खीर, पूड़ी और हलवा। यह भोजन सभी साथ में खाते हैं, जिससे बंधन मजबूत होता है।
इन रीतियों का उद्देश्य सिर्फ समारोह नहीं बल्कि परिवार के भीतर प्रेम और सम्मान को फिर से ताज़ा करना है।
आजकल कई लोग इसे ‘तुलसी पूजा’ या ‘विवाह उत्सव’ भी कहते हैं, लेकिन मूल भाव वही रहता है – महिलाओं की महत्ता को पहचानना। अगर आप अपने घर में यह रिवाज अपनाना चाहते हैं तो बस थोड़ा समय और मन से तैयार रहें; महँगा कुछ नहीं चाहिए, सच्ची भावना ही पर्याप्त है।
तुलसी विवाह के बाद अक्सर एक छोटा ‘भोजन सभा’ भी रखा जाता है जहाँ सब मिलकर गाने‑गाते, नाचते और खुशियाँ बाँटते हैं। यह खुशी का अवसर सभी को याद रहता है और आने वाले सालों में पारिवारिक तालमेल बनाये रखता है।
यदि आप इस रिवाज को अपने जीवन में शामिल करने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले अपने बड़े बुजुर्गों से बात करें, उनके अनुभव सुनें और फिर अपनी शैली के अनुसार छोटे‑छोटे बदलाव कर सकते हैं। मुख्य बात यह है कि हर कदम पर प्रेम और सम्मान बरकरार रहे।
अंत में यही कहा जा सकता है—तुलसी विवाह सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि परिवार को फिर से जोड़ने का साधन है। इसे अपनाएँ, और अपने घर में खुशियों की नई लहर देखें।
