
कार्तिक एकादशी: क्या है, कब मनाते हैं और कैसे करते हैं व्रत?
अगर आप हिन्दू कैलेंडर के त्योहारों में दिलचस्पी रखते हैं तो कार्तिक एकादशी आपके लिए जरूरी जानकारी का स्रोत बन सकती है। यह दिन कार्तिक महीने की 11वीं तिथि को आता है, जब सूर्य और चंद्रमा दोनों ही विष्णु के शत्रु मानते हैं, इसलिए इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने की परम्परा है।
कार्तिक एकादशी का धार्मिक महत्व
पुराणों में कहा गया है कि कार्तिक एकादशी को ‘नरक द्वार’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन शत्रु पापियों के लिए नरक खुलता है। लेकिन वही लोग जो व्रत रख कर विष्णु की आरती सुनाते हैं और कथा पढ़ते हैं, उन्हें मोक्ष मिल सकता है। कई ग्रंथों में बताया गया है कि एकादशी का उपवास शरीर को शुद्ध करता है, मन को स्थिर बनाता है और आध्यात्मिक उन्नति में मदद करता है।
व्रत की आसान विधि और पूजा के कदम
कार्तिक एकादशी पर व्रत रखने वाले लोग आम तौर पर सुबह स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनते हैं। फिर वैष्णव मंदिर में जाकर भगवान विष्णु या उनके अवतारों—श्री कृष्ण, श्री राम—की पूजा करते हैं। मुख्य रूप से जल, चावल, दाल, फल और शहद का भोग लगाते हैं; पर अगर आप फास्टिंग पूरी तरह नहीं करना चाहते तो केवल फल ही खा सकते हैं। उपवास के बाद शाम को अर्धरात्रि तक गंधार या कच्ची लड्डू (जैसे मोतीचूर) भी खाया जा सकता है।
पूजा में विशेष मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का उच्चारण करें और 108 जपे के साथ जल अर्पित करें। यदि आपके पास नहीं है तो आप सरलता से गीता या विष्णु सहस्त्रनाम पढ़ सकते हैं—यह मन को शांति देता है।
एकादशी के दिन सामाजिक कार्य भी किया जाता है, जैसे जरूरतमंदों को खाना देना या गरीब बच्चों को शिक्षा सामग्री प्रदान करना। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति में मदद करता है बल्कि समाज में सकारात्मक प्रभाव डालता है।
इस साल कार्तिक एकादशी की प्रमुख तिथियां 10 नवंबर और 8 दिसंबर को पड़ेंगी। अगर आप कैलेंडर का अनुसरण नहीं कर पा रहे हैं तो हमारे मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर रिमाइंडर सेट कर सकते हैं, जिससे कोई भी दिन मिस न हो।
तो अगली बार जब कार्तिक एकादशी आए, तो इस गाइड को याद रखें, सरल व्रत रखकर शुद्धि पाएं और भगवान की कृपा से जीवन में सुख-शांति लाएँ। रोज़ रिपोर्टर पर ऐसे ही उपयोगी जानकारी के लिए जुड़े रहें।
