इलेक्ट्रिक वाहन: अब जब हर कोने में इलेक्ट्रिक कारें दिख रही हैं

आपने अभी‑ही सुना होगा कि दिल्ली, मुंबई या बैंगलोर की सड़कों पर नई‑नई इलैक्ट्रिक गाड़ियां घूम रही हैं। असल में यह सिर्फ शोर नहीं है – ये बदलाव हमारी ड्राइविंग के तरीके को पूरी तरह बदल रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि इलेक्ट्रिक कारें क्या हैं, क्यों खरीदनी चाहिए और शुरुआती लोग किन बातों का ख्याल रखें।

इलेकट्रिक वाहन की बुनियादी बातें

साधारण पेट्रोल‑डिज़ल गाड़ी के इंजन को मोटर से बदल दिया जाता है, और ऊर्जा बैटरियों में स्टोर रहती है। चार्जिंग पॉइंट पर प्लग लगाते ही बैटरी फिर से काम करने लगती है – बिलकुल मोबाइल फ़ोन की तरह। सबसे बड़ी बात? पेट्रोल या डीज़ल नहीं, तो ईंधन खर्च शून्य के करीब। साथ ही धुआँ कम निकलता है, इसलिए शहर की हवा साफ़ होती है।

भारत में इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले देखनी वाली चीजें

1. बैटरी रेंज और वारंटी: अधिकांश नई ईवी 300‑400 किमी तक चल सकती हैं, लेकिन वास्तविक रेंज मौसम, ड्राइविंग स्टाइल और एसी इस्तेमाल पर घट सकती है। निर्माता की वारंटी (आमतौर पर 8 साल या 150,000 किमी) देखना ज़रूरी है, ताकि बाद में बैटरी बदलने का खर्च न आए।

2. चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर: आपके घर के पास लेवल‑2 चार्जर (22 kW) या सार्वजनिक फास्ट चार्जर (50‑150 kW) उपलब्ध हो तो जीवन आसान रहता है। भारत सरकार ने 2025 तक 2,00,000 सार्वजनिक स्टेशनों का लक्ष्य रखा है – अब इस आंकड़े को अपने नजदीकी क्षेत्रों में जांचें।

3. सब्सिडी और स्कीम: राज्य‑स्तर पर कई मोटर वाहन विभाग ईवी खरीदने वाले ग्राहकों को 1 लाख रुपये तक की रियायत देते हैं। साथ ही, फाइनेंसिंग आसान हो गई है; कई बैंक्स अब लो‑इंटरेस्ट लोन दे रहे हैं।

4. रख‑रखाव लागत: इलेक्ट्रिक मोटर में पार्ट्स कम होते हैं, इसलिए नियमित सर्विस की ज़रूरत भी कम होती है। तेल बदलना, एयर फ़िल्टर साफ़ करना जैसी चीजें नहीं करनी पड़तीं, बस बैटरी और ब्रेक सिस्टम का ध्यान रखें।

5. कुल खर्च (TCO): शुरुआती कीमत कुछ अधिक लग सकती है, पर पेट्रोल/डिज़ल की बचत, कम सर्विसिंग और टैक्स रिवॉर्ड मिलाकर कई सालों में आप 2‑3 लाख रुपये तक बचा सकते हैं। एक आसान कैलकुलेटर ऑनलाइन उपलब्ध है – बस अपनी ड्राइविंग पैटर्न डालें, और देखिए कब ब्रेक‑ईवन पॉइंट आता है।

इन बिंदुओं को ध्यान में रख कर आप सही मॉडल चुन सकते हैं: टेस्ला मॉडल 3, टाटा नेक्सॉन ईवी, महिंद्रा एवरसॉन या होंडा इकोनॉमिक जैसी कारें अब भारतीय बाजार में लोकप्रिय हो रही हैं। हर गाड़ी का फ़ीचर सेट अलग है – कुछ तेज़ चार्जिंग देते हैं, तो कुछ लंबी रेंज पर फोकस करते हैं।

एक और बात जो अक्सर नजरअंदाज़ हो जाती है, वह है बैटरी की “डिप्थ‑ऑफ़‑डिस्चार्ज” (DoD) का ध्यान रखना। यदि आप बैटरियों को 20 % से नीचे नहीं लाते या पूरी तरह 100 % तक नहीं भरते, तो उनकी लाइफ बढ़ती है। रोज़ाना 80 % चार्जिंग और 30 % डिस्चार्ज रेंज में रहने से बैटरी कई सालों तक स्वस्थ रहती है।

भविष्य की बात करें तो इलेक्ट्रिक वैन, दोपहिया स्कूटर और हाईवे‑फ़ास्ट चार्जिंग नेटवर्क जल्दी ही आम हो जाएंगे। सरकार ने 2030 तक सभी नई कारें 30 % इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य रखा है – इसका मतलब है कि अगले कुछ सालों में ईवी मॉडल की रेंज बहुत बढ़ेगी और कीमत घटेगी।

तो अगर आप अब भी सोच रहे हैं कि कब बदलना चाहिए, तो याद रखें: आज ही एक छोटा कदम उठाना (जैसे घर पर चार्जर लगवाना या टैक्स स्कीम का फायदा लेना) आपको बड़ी बचत की ओर ले जाता है। इलेक्ट्रिक वाक्यन सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि साफ़ हवा और किफायती ड्राइविंग का सॉल्यूशन हैं।

टाटा कर्व कूपे एसयूवी की उत्पादन-संस्करण का खुलासा: इलेक्ट्रिक, पेट्रोल और डीजल विकल्पों के साथ

टाटा कर्व कूपे एसयूवी की उत्पादन-संस्करण का खुलासा: इलेक्ट्रिक, पेट्रोल और डीजल विकल्पों के साथ

टाटा मोटर्स ने अपने कर्व कूपे एसयूवी के उत्पादन संस्करण का खुलासा किया है, जिसमें इलेक्ट्रिक, पेट्रोल और डीजल इंजन विकल्प होंगे। इसे पहली बार अप्रैल 2022 में ऑल-इलेक्ट्रिक कॉन्सेप्ट के रूप में और जनवरी 2023 में आईसीई संस्करण के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इसका डिज़ाइन बोल्ड और आधुनिक है।