संसद सर्दियों की सत्र: 14 विधेयक पास हुए, समवर्ती चुनाव विवाद का असर
मार्च, 26 2026
निर्मला सीतारामन, वित्त मंत्री और भारत सरकार ने 2025 के वर्ष की सर्दियों की सत्र का पहला दिन ही ऐतिहासिक बना दिया था। 1 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में कुल 15 बैठकों के दौरान सरकार ने अपनी विशाल कार्यवाही दिखाई। आंकड़ों को देखें तो 14 प्रमुख विधेयक पेश किए गए थे, जो देश के व्यापक सुधार के लिए आधारस्तंभ बन रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सब कुछ स्मूथ रहा या फिर कुछ मुद्दे तल्खियां पैदा कर गए?
सत्य तो ये है कि सरकार ने अपनी नियोजित योजनाओं के साथ ही विपक्ष की चुनौतियों का भी सामना किया। लोका सभा अध्यक्ष ओम बिर्ला ने उम्मीद जताई थी कि यह सत्र उत्पादक होगा, हालांकि सदन में नारेबाजी देखने को मिली। विशेष रूप से जब स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक विशेष शुल्क के प्रस्ताव पर चर्चा हुई, तो वातावरण गर्म हो गया।
बीमा कानून और निवेश में बदलाव
इस सत्र का सबसे चर्चित हिस्सा था बीमा कानून (सुधार) विधेयक, जिसे 16 दिसंबर 2025 को पास कर दिया गया। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य 2047 तक सार्वभौमिक बीमा कवरेज लाना था। इसके तहत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% कर दी गई। यह एक बड़ा कदम था जो वैश्विक कंपनियों के लिए भारत में अपनी जगह बनाने का रास्ता खोलता है।
अरुण जेटली जैसी प्रतिबद्धताएं अब जय शंकर और उनकी टीम द्वारा अंग्रेजी भाषा में की जाती हैं—मजाक नहीं, गंभीरता है। सच है कि पिछले साल भारतीय इन्शोरेंस इंस्टिट्यूट का डेटा इन उठावे पर आधारित था। सत्र के दौरान वित्तीय कानूनों के सुधार के साथ-साथ कंपनी कानूनों में भी संशोधन हुए।
ग्रामीण विकास और रोजगार मिशन
16 दिसंबर को लोक सभा में भारत सरकार ने दो और प्रमुख विधेयक लाए। 'विकासी भारत रोजगार और जीवन मिशन ग्रामीण' विधेयक, जो मौजूदा ग्रामीण रोजगार कानून को बदलने की मांग करता था, तीव्र गति से पास हुआ और उसी दिन राष्ट्रपति के हस्ताक्षर पाकर अधिनियम बना।
उद्देश्य साफ़ था: गांवों में बेरोजगारी कम करना और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करना। इसे देखते हुए कीरन रिजु, जो संसदीय मामलों और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं, ने कहा कि यह सरकार का लंबा खेल नहीं है। उन्होंने 36 राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक भी आयोजित की थी, जिसमें 50 नेताओं ने भाग लिया था।
समवर्ती चुनाव और विवाद
परंतु हर कदम सहमति वाला नहीं है। अनुच्छेद (131वीं संशोधन) विधेयक के बारे में बात की जा रही थी, जो समवर्ती चुनावों (एक बार में कई चुनाव) का विवाद है। इसका मुख्य लाभ खर्च कम करना और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट की बार-बार लागू होने से बचना था।
हालाँकि, भगवंत मैन, पंजाब के मुख्यमंत्री और शिरोमनी अकाली दल ने इसे कठोर विरोध किया। उन्होंने 22 नवंबर 2025 को दावा किया कि यह पंजाब और федерलिज़म के खिलाफ है। विपक्ष ने इसे "फेडरलिज़म के खिलाफ षड्यंत्र" कहा। इस पर संसद के समिति ने 2026 के बजट सत्र तक रिपोर्ट देने की मांग की।
शिक्षा सुधार और आगे की योजना
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ी गतिशीलता आई। 'विकासी भारत शिक्षा अड़िष्ठासन' विधेयक 15 दिसंबर को पेश किया गया और उसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया। उच्च शिक्षा सुधारों को आगे बढ़ाते हुए अब यह रिपोर्ट बजट सत्र 2026 के पहले भाग में जमा करने की उम्मीद है।
भविष्य में क्या होगा? 2026 का बजट सत्र, जो जनवरी में शुरू हुआ, समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। पूंजी बाजार पुनर्गठन और संसद के अपुरे कामों को पूरा करने की जिम्मेदारियां अब बजट सत्र पर टिकी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बीमा विधेयक से आम नागरिक को क्या फायदा होगा?
इससे विदेशी निवेश 100% तक बढ़ाया गया है, जिससे बीमा प्रीमियम कम हो सकते हैं और सर्वसुलभता बढ़ सकती है।
समवर्ती चुनाव विधेयक अभी कहां पर है?
यह विधेयक संयुक्त समिति के पास भेजा गया है और रिपोर्ट 2026 के बजट सत्र की अंतिम हफ्ते में आनी है।
क्या रोबोटिक रोजगार मिशन कोई नया है?
हाँ, इसने पुराने ग्रामीण रोजगार कानून को स्थानांतरित कर दिया है और 16 दिसंबर को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी थी।
विपक्ष ने किस कानून का सबसे ज्यादा विरोध किया?
विपक्ष ने 131वें संवैधानिक संशोधन और समवर्ती चुनावों के प्रस्ताव का कठोर विरोध किया है, जो पंचायतों तक फैल सकता है।